गर्भवती महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सलाह व योगा
परम पूज्य संत श्री आशाराम बापूजी द्वारा प्रेरित
मुख्य अंश:
* पहला तो मुँह खोल के साँस लें जब पीड़ा हो |
* दूसरा कुछ आसन है जो तीसरे महीने से शुरू करने है जब तक प्रसूति न हो तब तक कर सकतें है इन आसनों से प्रसूति बड़े आराम से होती है |
* जींस स्त्री शरीर की जो रचना है उसको दुर्बल बनाती है, कमर को बिलकुल टाइट बना देती है | इससे प्रसूति की जगह सुकड़ जाती है जिससे नॉर्मल डिलिवरी नही होती |
* पहले तो जिस स्थिति में पौंछा लगाते है ऐसी स्थिति में बैठना है और १०० कदम चलने है, पहले दिन १० कदम चलिए धीरे-धीरे
५-५ कदम बढ़ाएं, १०० कदम तक, तीसरे महीने से शुरू करना है जब तक प्रसूति न हो तब तक कर सकतें है |
* पालथी मार के बैठ जाएँ और दोनों पैरों के पंजों को जोड़ दे और दोनों हाथ घुटनों पर रखे थोडा सा दबाव दे और छोड़ दे, केवल तीन बार करना है |
* ताजे गोबर का १२-१५ मी. ली. रस या तुलसी का रस उस समय २१ बार “ॐ नमो नारायणाय” मन्त्र का जप जरुर करना है फिर उसका सेवन करें |
* पैर की जो एडियाँ है उनपे अंगूठे से थोड़ी देर दबाव दे २-३ बार फिर छोड़ दे (जगह फोटो में देखें) ये क्रिया ३-४ बार करें |
* प्रसूति के समय शांत रहे, प्रसन्न रहे तो बच्चे को भी बाहर आने में उतनी पीड़ा नही होगी |
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