इस योगासन को करने से रीढ़ की हड्डी को मजबूती और लचीलापन मिलता है। इससे मस्तिष्क और शरीर के बीच बेहतर समन्वय बना रहता है। मस्तिष्क से आने वाली तरंगे शरीर के हर अंग में बिना रुकावट के पहुंचती हैं। रीढ़, कमर और पीठ की मांसपेशियों में खिंचाव आने से मस्तिष्क और शरीर में रक्त का संचार भी अच्छे ढंग से होने लगता है।

भुजंगासन फेफड़ों के प्यूरीफिकेशन के लिए अच्छा है। दमा, खांसी और फेंफड़ों से जुड़ी बीमारियों से राहत दिलाता है। यह आसन करने से डाइजेशन अच्छा बना रहता है। कब्ज दूर करने में भी सहायक है।

यह आसन आपकी पेट की चर्बी कम करने में मददगार है।

सही मांसपेशियों में खिंचाव बनने से इस आसन को करने से कंधों को मजबूती मिलती है। ( इसका रखें ध्यान ). पेट में कोई रोग या पीठ में अत्यधिक दर्द हो तो यह आसन न करें। पेप्टिक अल्सर, हर्निया और हाइपर थाईरॉडियम के रोगियों को भुजंगासन किसी योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही करना चाहिए।

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